
संघो गुणसंघाओ संघो य विमोचओ य कम्माणं ।
दंसणणाणचरित्ते संघायंतो हवे संघो॥720॥
गुण समूह का नाम संघ यह कर्म कलंक विमुक्त करे ।
सम्यग्दर्शन-ज्ञान-चरित के हो सुमेल से संघ खरे॥720॥
अन्वयार्थ : संघ गुणों का समूह है, संघ कर्म का नाश करनेवाला है, दर्शन-ज्ञान-चारित्र में इकट्ठा करता है । जो समूहरूप करे, वह संघ कहलाता है ।
सदासुखदासजी