
अच्छीणि संघसिरिणो मिच्छत्तणिकाचणेण पडिदाइं ।
कालगदो वि य संतो जादो सो दीहसंसारे॥738॥
संघश्री नामक मन्त्री के फूट गए थे दोनों नेत्र ।
तीव्र मोह के कारण, वह भटका अनन्त भव में मर के॥738॥
अन्वयार्थ : जैसे संघश्री नामक किसी पुरुष के मिथ्यात्व की तीव्रता से दोनों नेत्र आय पडे/ आँखें आ गईं और बाद में अंधा हो गया, तीव्र वेदना भोगता हुआ मरण करके अनंत संसार में परिभ्रमण करने वाला हुआ ।
सदासुखदासजी