पं-सदासुखदासजी
मणसा गुणपरिणामो वाचा गुणभासणं च पंचण्हं ।
काएण संपणामो एस पयत्थो णमोक्कारो॥760॥
पंच प्रभु का मन से गुण-चिन्तन वचनों से वही कथन ।
काया से वन्दन-यह जानो नमस्कार का अर्थ ग्रहण॥760॥
सदासुखदासजी