+ अब कोई यह आशंका करेगा कि पंच नमस्कार मंत्र ही संसार का नाश करने में समर्थ है तो सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक्चारित्र - इनको मोक्षमार्ग कहा, यह कहना विरुद्ध हो जायेगा? उसका उत्तर - -
चदुरंगाए सेणाए णायगो जह पवत्तओ होदि ।
तह भावणमोक्कारो मरणे तवणाणचरणाणं॥763॥
चतुरंगी सेना का नायक करे प्रवर्तन सेना का ।
भाव नमस्कार करता है वैसे ज्ञान चरित तप का॥763॥
अन्वयार्थ : जैसे चतुरंग सेना का नायक - प्रवर्तक होता है । नायक बिना सेना कुछ करने में समर्थ नहीं, वैसे ही मरण के समय में भाव नमस्कार है; वह तप, ज्ञान, चारित्र का प्रवर्तक है । भाव नमस्कार के बिना दर्शन, ज्ञान, चारित्र, तप की प्रवृत्ति नहीं होती ।

  सदासुखदासजी