आराधणापडायं गेण्हंतस्स हु करो णमोक्कारो ।
मल्लस्स जयपडायं जह हत्थो घेत्तुकामस्स॥764॥
जैसे विजय पताका लेने वाले सैनिक का है हाथ ।
आराधना पताका लेने वाले का है नमस्कार1॥764॥
अन्वयार्थ : आराधनापताका को ग्रहण करने वाले पुरुष का यह पंच नमस्कार मंत्र हस्त है । जैसे जय/जीत, उसकी ध्वजा को ग्रहण करने का इच्छुक जो मल्ल/योद्धा उसके हाथ हैं, हाथ बिना ध्वजा ग्रहण नहीं होती, वैसे ही पंच नमस्कार मंत्र के शरण बिना आराधना भी ग्रहण नहीं होती ।

  सदासुखदासजी