णाणं पयासओ सो वओ तवो संजमो य गुत्तियरो ।
तिण्हंपि समाओगे मोक्खो जिणसासणे दिट्ठो॥775॥
ज्ञान प्रकाशक बन्ध-मोक्ष का तप शोधक संयम गोपक ।
जिनशासन में कहा गया है ये तीनों मिलकर शिवपथ॥775॥
अन्वयार्थ : ज्ञान, सर्वपदार्थ का प्रकाशक है । तप, वह कीटिका की भाँति आत्मा से कर्मम ल को दूर करके आत्मा का शोधक है । संयम, वह आने वाले नवीन कर्म को रोकने में तत्पर है; अत: संवर है, तीनों का संयोग (सुमेल) होने पर मोक्ष होता - ऐसा जिनशासन में दिखलाया गया है ।

  सदासुखदासजी