
णाणुज्जोएण विणा जो इच्छदि मोक्खमग्गमुवगंतुं ।
गंतु कडिल्लमिच्छदि अंधलओ अंधयारम्मि॥777॥
ज्ञान-प्रकाश बिना जो यदि शिवपुर पथ पर चलना चाहे ।
तो वह अन्धा अन्धकार में दुर्ग विजय करना चाहे॥777॥
अन्वयार्थ : जो पुरुष ज्ञान के उद्योत बिना चारित्र तप रूप मोक्षमार्ग में गमन करना चाहता है, वह अंधा होकर भी महा अंधकार युक्त अति दुर्गमस्थान में गमन करना चाहता है ।
सदासुखदासजी