जइदा खंडसिलोगेण जमो मरणा दु फेडिदो राया ।
पत्तो य सुसामण्णं किं पुण जिणउत्तसुत्तेण॥778॥
जइदा खंडेसलागिणि जमाि मरणा दु फिेडदाि राया ।
त्तिाि य सुसामण्णं किं िुण ेजणउत्तसुत्तणि॥778॥
अन्वयार्थ : देखो! यम नामक राजा ने खंड/अधूरे श्लोक के स्वाध्याय करने से ही मरण से भयभीत होकर श्रमणपने - मुनिपने को ग्रहण कर लियातो जिनेन्द्र कथित सूत्र का अध्ययन करने वाले का क्या कहना?

  सदासुखदासजी