तेलोक्कजीविदादो वरेहि एक्कदरगत्ति देवेहिं ।
भणिदो को तेलोक्कं वरिज्ज संजीविदं मुच्चा॥788॥
यदि कोई सुर कहे चुनो तुम जीवन अरु त्रिलोक में एक ।
कहो कौन जीवन को तजकर तीन लोक को ग्रहण करे॥788॥
अन्वयार्थ : कोई देव कहे कि एक तो त्रैलोक्य का राज्य है और दूसरा आपका जीवन, इन दोनों में से एक ग्रहण कर लो तो क्या आप अपना जीवन छोडकर तीन लोक का राज्य ग्रहण करते हो? नहीं ।

  सदासुखदासजी