
जं एवं तेलोक्कं णग्घदि सव्वस्स जीविदं तह्मा ।
जीविदघादो जीवस्स होदि तेलोक्कघादसमो॥789॥
इसप्रकार जीवों का जीवन-मूल्य कहा है तीनों लोक ।
जीवघात करनेवाले ने घात किये हैं तीनों लोक॥789॥
अन्वयार्थ : क्योंकि सर्व प्राणियों को जीवन के मोल/कीमत के समान, तीन लोक भी नहीं हैं, इसलिए जीव के जीवन का घात, वह तीन लोक के घात समान है ।
सदासुखदासजी