
णत्थि अणूदो अप्पं आयासादो अणूणयं णत्थि ।
जह तह जाण महल्लं ण वयमहिंसासमं णत्थि॥790॥
अणु से छोटा और गगन से बड़ा नहीं है कोई पदार्थ ।
इसी तरह है नहीं अहिंसा व्रत से बड़ा और भी व्रत॥790॥
अन्वयार्थ : जैसे अणु/परमाणु, उससे कोई छोटा नहीं है और आकाश से अन्य कोई महत्प्रमाण/बडा नहीं है, वैसे ही अहिंसा समान महान कोई व्रत नहीं है ।
सदासुखदासजी