सीलं वदं गुणो वा णाणं णिस्संगदा सुहच्चाओ ।
जीवो हिंसंतस्स हु सव्वे वि णिरत्थया होंति॥795॥
शील ज्ञान गुण व्रत निःसंगता और विषय सुख का परित्याग ।
जीवों की हिंसा करने वाले के सभी निरर्थक जान॥795॥
अन्वयार्थ : जीवों की हिंसा करने वाले पुरुष के शील, व्रत, गुण, ज्ञानाभ्यास, नि:संगता तथा सुख, त्याग सर्व ही गुण निरर्थक होते हैं ।

  सदासुखदासजी