गोबंभणित्थिवधमेत्तिणियत्ति जदि हवे परमधम्मो ।
परमो धम्मो किह सो ण होइ जा सव्वभूददया॥798॥
यदि ब्राह्मण-गौ-नारी वध का त्याग मात्र ही धर्म परम ।
क्यों न कहें तो सब जीवों की रक्षा करना धर्म परम॥798॥
अन्वयार्थ : जब अन्य एकांती जन गाय-ब्राह्मण-स्त्री की हिंसा के त्याग को ही परम धर्म कहते हैं, तब सर्व प्राणीमात्र की दया वह परमधर्म कैसे नहीं होगी?

  सदासुखदासजी