
अप्पाउगरोगिदयाविरूवदाविगलदा अवलदा य ।
दुम्मेहवण्णरसगंधदाय स होइ परलोए॥804॥
जन्मान्तर में रोगी दुर्बल विकलेन्द्रिय एवं बदरूप ।
बुरे रूप-रसवाला दुर्गन्धित हिंसक होता है मूर्ख॥804॥
अन्वयार्थ : हिंसक जीव को परलोक में अल्प आयु, रोगीपना, विरूपपना, विकलपना, निर्बलपना, दुर्बुद्धिपना, बुरा वर्ण, बुरा रस, खराब गन्ध सहितपना अनेक जन्मों पर्यंत होते हैं ।
सदासुखदासजी