रागी अथवा द्वषिी या माहिी प्राणी जाि करें प्रयागि ।
उसमें हिंसा हातिी है इसेलए उन्हें हिंसक जानाि॥808॥
रागी अथवा द्वेषी या मोही प्राणी जो करें प्रयोग ।
उसमें हिंसा होती है इसलिए उन्हें हिंसक जानो॥808॥

  सदासुखदासजी