पं-सदासुखदासजी
आत्मा ही है हिंसा और अहिंसा, कहा ेजनागम में ।
अप्रमत्त जाि वही अहिंसक जाि प्रमत्त वह हिंसक है॥809॥
आत्मा ही है हिंसा और अहिंसा, कहा जिनागम में ।
अप्रमत्त जो वही अहिंसक जो प्रमत्त वह हिंसक है॥809॥
सदासुखदासजी