जीव मरें या नहीं मरि रि हिंसा कि पिरणामों सि ।
बँधता है यह जीव, बन्ध का सार कहा है ेनश्चय सि॥810॥
जीव मरें या नहीं मरे पर हिंसा के परिणामों से ।
बँधता है यह जीव, बन्ध का सार कहा है निश्चय से॥810॥

  सदासुखदासजी