कमाब का क्षय करनि हतिु ज्ञानी उद्यम करति हैं ।
हिंसा में नहिं उद्यम करति वि अप्रमत्त अहिंसक हैं॥811॥
कमाब का क्षय करने हेतु ज्ञानी उद्यम करते हैं ।
हिंसा में नहिं उद्यम करते वे अप्रमत्त अहिंसक हैं॥811॥

  सदासुखदासजी