+ अब जीवगत आधार के एक सौ आठ भेद कहते हैं- -
संरंभसमारंभारंभं जोगेहिं तह कसाएहिं ।
कदकारिदाणुमोदेहिं तहा गुणिदा पढमभेदा॥817॥
समारम्भ संरम्भारम्भ तीन योग अरु चार कषाय ।
कृत-कारित-अनुमोदन गुणा करें तो भेद एक सौ आठ॥817॥

  सदासुखदासजी