+ होते हैं- -
णिक्खेवो णिव्वत्ति तहा य संजोयणा णिसग्गो य ।
कमसो चदु-दुग-दुग-तिय भेदा होंति हु विदीयस्स॥819॥
है अजीव अधिकरण चार, निक्षेप कहे हैं चार प्रकार ।
निवर्तना संयोजना दो दो निसर्ग त्रय प्रकार॥819॥
अन्वयार्थ : 1. निक्षेप, 2. निर्वर्तना, 3. संयोजना, 4. निसर्ग । उसमें निक्षेपण/धरना वह निक्षेप है, निपजाना वह निर्वर्तना है, मिलाना वह संयोजना है और निसर्जन-प्रवर्ताना वह निसर्ग है । उनमें से निक्षेप के चार प्रकार हैं, निर्वर्तना के दो प्रकार हैं, संयोजना के दो प्रकार हैं और निसर्ग के तीन प्रकार हैं । ऐसे दूसरे अजीवाधिकरण के भेद हैं ।

  सदासुखदासजी