+ यही गोम्मट्टसार ग्रन्थ में कहा है- -
अहवा सयबुद्धीए पडिसेधो खेत्तकालभावेहिं ।
अविचारिय णत्थि इहं घडोत्ति जह एवमादीयं॥831॥
अथवा क्षेत्र-रु काल भाव से निज बुद्धि से करे निषेध ।
बिना विचारे कहना जैसे घड़ा नहीं इत्यादि कथन॥831॥
अन्वयार्थ : अथवा द्रव्य, क्षेत्र, काल, भावों से बिना विचारे अपनी बुद्धि से वस्तु का निषेध करना - यह प्रथम असत्य है । जैसे द्रव्य, क्षेत्र, काल, भावों से बिना विचारे कहना कि 'यहाँ घट नहीं है' इत्यादि की तरह ।

  सदासुखदासजी