जं असभूदुब्भावणमेदं विदियं असंतवयणं तु ।
अत्थि सुराणमकाले मच्चुत्ति जहेवमादीयं॥832॥
असद्भूत को सत् कहना है द्वितिय असत्य वचन का भेद ।
जैसे देवों की अकाल मृत्यु होती इत्यादि कथन॥832॥
अन्वयार्थ : असद्भूत को प्रगट करना, वह दूसरा असत्य वचन है । जैसे - देवों की अकाल मृत्यु होती है, इत्यादि कहना ।

  सदासुखदासजी