सच्चं वदेति रिसओ रिसीहिं विहिदा उ सव्व विज्जाओ ।
मिच्छस्स वि सिज्झंति य विज्जाओ सच्चवादिस्स॥843॥
ऋषिगण सत्य बोलते उनने सब विद्या का किया विधान ।
सत् वक्ता यदि हो म्लेच्छ तो भी उसको सब मिलें निधान॥843॥
अन्वयार्थ : ऋषि, जो यति हैं, वे सत्य ही कहते हैं । ऋषियों के द्वारा कही गई सभी विद्यायें सत्य बोलने वाले म्लेच्छ के भी सिद्ध हो जाती हैं ।

  सदासुखदासजी