माया व होइ विस्सस्सणिज्ज पुज्जे गुरुव्व लोगस्स ।
पुरिसो हु सच्चवादी होदि हु सणियल्लओव्व पिओ॥846॥
माता-सम विश्वास योग्य अरु गुरु-समान होता है पूज्य ।
बन्धु-समान लोकप्रिय होता जो नर सत्य वचन धारी॥846॥
अन्वयार्थ : सत्यवादी पुरुष लोगों को माता के समान विश्वास करने योग्य होता है, गुरु की तरह पूज्य होता है और निज बांधव के समान प्रिय होता है ।

  सदासुखदासजी