सच्चं अवगददोसं वुत्तूण जणस्स मज्झयारम्मि ।
पीदिं पावदि परमं जसं च जगविस्सुदं लहइ॥847॥
दोष रहित जो सत्यवचन बोले यदि नर जन-गण के बीच ।
जग प्रसिद्ध उत्कृष्ट सुयश एवं जनता का प्रेम मिले॥847॥
अन्वयार्थ : दोषों से रहित सत्य कहकर लोगों के बीच उत्कृष्ट प्रीति को प्राप्त होता है और जगत में विख्यात यश को प्राप्त करता है ।

  सदासुखदासजी