सच्चम्मि तवो सच्चम्मि संजमो तह वसे सया वि गुणा ।
सच्चं णिबंधणं हि य गुणाणमुदधीव मच्छाणं॥848॥
तप संयम अरु अन्य सभी गुण रहते हैं सत् के आधार ।
मगरमच्छ का कारण सागर वैसे सत् गुण का आधार॥848॥
अन्वयार्थ : सत्य ही परम तप है । सत्य में ही संयम तथा अन्य समस्त गुण बसते हैं । जैसे मत्स्यों को बसने का आधार समुद्र है, वैसे ही सम्पूर्ण गुणों को बसने का आधार सत्य है ।

  सदासुखदासजी