
अलियं स किं पि भणिदं घादं कुणदि बहुगाण सव्वाणं ।
अदिसंकिदो य सयमवि होदि अलियभासणो पुरिसो॥853॥
एकबार का झूठ बहुत बोले गए सत् का करता नाश ।
सत्य कथन को झूठ कहें जन झूठा भी रहता भयवान॥853॥
अन्वयार्थ : एक बार भी कहा गया असत्य, बहुत सत्यवचनों को नाश करता है और झूठ वचन बोलने वाला पुरुष आप भी अतिशंकित रहता है ।
सदासुखदासजी