पं-सदासुखदासजी
सव्वो उवहिदबुद्धि पुरिसो अत्थे हिदे य सव्वो वि ।
सत्तिप्पहारविद्धो व होदि हिदयम्मि अदिदुहिदो॥864॥
धनासक्त हैं सभी लोग इसलिए हरण धन करने में ।
घात हुआ ज्यों शक्ति अस्त्र का वैसा अति दुःख पाते हैं॥864॥
सदासुखदासजी