अडईगिरिदरिसागरजुद्धाणि अडंति अत्थलोभादो ।
पियबंध वेवि जीवं पि णरा पयहंति धणहेदुं॥866॥
अर्थ लोभ से वन गिरि गुफा उदधि में भटके युद्ध करे ।
धन के लिए मनुज प्रियजन या निज जीवन का त्याग करें॥866॥

  सदासुखदासजी