पं-सदासुखदासजी
लोगम्मि अत्थि पक्खो अवरद्धंतस्स अण्णमवराधं ।
णियलोया विपक्खे ण होंति चोरिक्कसीलस्स॥869॥
हिंसादिक अपराधी का तो लोग समर्थन भी करते ।
किन्तु चोर का पक्ष कभी बन्धु-बान्धव भी नहिं करते॥869॥
सदासुखदासजी