परलोगम्मि य चोरो करेदि णिरयम्मि अप्पणो बसदिं ।
तिव्वाओ वेदणाओ अणुभवदि हि तत्थ सुचिरंपि॥877॥
चोर करे परलोक गमन तो करे नरक में अपना वास ।
और वहाँ पर बहुत काल तक तीव्र कष्ट में करे निवास॥877॥
अन्वयार्थ : चोरी करनेवाला पुरुष परलोक में भी अपनी बस्ती नरक में करता हैऔर वहाँ चिरकाल पर्यंत तीव्र वेदना का अनुभव करता है ।

  सदासुखदासजी