+ अब काम से विरक्त होने का उपाय कहते हैं- -
कामकदा इत्थिकदा दोसा असुचित्तबड्ढसेवा य ।
संसग्गीदोसा वि य करंति इत्थीसु वेरग्गं॥888॥
काम-दोष नारीकृत दोष अशुचिता और वृद्ध सेवा ।
नारी के संसर्ग-दोष चिन्तन से हो वैराग्य अहा॥888॥
अन्वयार्थ : इस जीव को जो दोष काम विकार से उत्पन्न होते हैं तथा स्त्रियों के किये दोष होते हैं, शरीर की अशुचिता जनित दोष हैं । वृद्धसेवा से जो गुण होते हैं तथा स्त्रियों की संगति से जो दोष होते हैं, उनका चिंतवन करने मात्र से स्त्रियों से वैराग्य उत्पन्न करते हैं ।

  सदासुखदासजी