
आसीविसेण अवरुद्धस्स विवेगा हवंति सत्तेव ।
दस होंति पुणो वेगा कामभुअंगावरुद्धस्स॥898॥
आशीविष है प्रमुख सर्प जिसके डसने पर सात प्रवेग ।
किन्तु काम के द्वारा डसे मनुज को होते हैं दश वेग॥898॥
अन्वयार्थ : सर्प में प्रधान आशीविष जाति नाम का सर्प, उसके द्वारा डसे गये पुरुष के तो सात वेग होते हैं और कामरूपी सर्प से डसे गये पुरुष के दश वेग होते हैं ।
सदासुखदासजी