जेठ्ठामूले जोण्हे सूरो विमले णहम्मि मज्झण्हे ।
ण डहवि तह जह पुरिसं डहदि विवड्ढंतओ कामो॥902॥
ज्येष्ठ माह का शुक्ल पक्ष मध्याह्न समय निर्मल आकाश ।
रवि न जलाये, वैसा नर को जैसा उसे जलाता काम॥902॥
अन्वयार्थ : ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष में निर्मल आकाश में मध्याः काल का सूर्य भी आताप से जितना दग्ध नहीं करता, उससे भी अधिक काम, पुरुष को दग्ध करता है- आताप करता है ।

  सदासुखदासजी