पं-सदासुखदासजी
सूरग्गी डहदि दिवा रत्तिं च दिवा य डहदि कामग्गी ।
सूरस्स अत्थि उच्छागारो कामग्गिणो णत्थि॥903॥
सूर्य जलाये केवल दिन में किन्तु जलाये निश-दिन काम ।
रवि से बचते छत्रादिक से किन्तु उपाय रहित है काम॥903॥
सदासुखदासजी