आयरियउवज्झाए कुलगणसंघस्स होदि पडिणीओ ।
कामकलिणा हु घत्थो धम्मियभावं पयहिदूण॥909॥
कामरूप कलिकाल ग्रस्त नर धर्म भाव से होता दूर ।
आचार्याेपाध्याय संघ कुल गण से होता है प्रतिकूल॥909॥
अन्वयार्थ : काम से मलिन पुरुष धर्मात्मापने को छोडकर आचार्य, उपाध्याय, कुल, गण, संघ से अपूठा/विपरीत/उल्टा होता है ।

  सदासुखदासजी