वारसवासाणि वि संवसित्तु कामादुरो ण याणीय ।
पादंगुट्ठमसंतं गणियाए गोरसंदीवो॥921॥
कामातुर होने से बारह वर्ष रहा गणिका के साथ ।
गोसंदीप न जान सका अंगुष्ठ रहित है उसका पाँव॥921॥
अन्वयार्थ : गोरसंदीप नामक कामी बारह वर्ष पर्यंत गणिका/वेश्या के साथ रहने पर भी गणिका के पैर में अंगुष्ठ नहीं था, यह जाना ही नहीं ।

  सदासुखदासजी