गायदि णच्चदि धावदि कसइ ववदि लवदि तह मलेइ णरो ।
तुण्णइ उण्णइ जाचइ कुलम्मि जादो वि विसयवसो॥923॥
गाये नाचे दौड़े खेती करे अन्न बोये काटे ।
वस्त्र सिले अरु बुने विषय वश कामुक ये सब कार्य करे॥923॥

  सदासुखदासजी