परमहिलं सेवंतो वेरं वधबंधकलहधणासं ।
पावदि रायकुलादो तिस्से णीयल्लयादो वा॥933॥
परनारीरत नर के बैरी कलह बंध वध धन का नाश ।
राज-पुरुष से या उसके सम्बन्धीजन से होता नाश॥933॥
अन्वयार्थ : परस्त्री सेवन करने वाले का सम्पूर्ण लोक बैरी होता है । कामसेवन करने वाले को राजा के मनुष्यों से तथा उस स्त्री के कुटुम्बियों से अनेक प्रकार का ताडन, मारण, बन्धन, कलह, धन का नाश तथा अपवाद अवश्य प्राप्त होता है ।

  सदासुखदासजी