मादा धूदा भज्जा भगिणीसु परेण विप्पयम्मि कदे ।
जह दुक्खमप्पणो होइ तहा अण्णस्स वि णरस्स॥935॥
अपनी माता पुत्री भगिनी से करता हो दुर्व्यवहार ।
जैसा दुःख हमको होता है होता पर को उसी प्रकार॥935॥

  सदासुखदासजी