
जमणिच्छंती महिलं अवसं परिभुंजदे जहिच्छाए ।
तह य किलिस्सइ जं सो तं परदारगमणफलं॥937॥
जो नारी हो विवश अवांछित नर द्वारा भोगी जाती ।
पूर्व-जन्म में पर-नारी सेवन का फल है वह पाती॥937॥
अन्वयार्थ : जो कोई स्त्री नहीं चाहती, अवश/परवश होकर यथेच्छ जबरदस्ती कोई पुरुष सेवन करता है, वह स्त्री अतिक्लेश को पाती है । यह सब पूर्व जन्म में पर स्त्री सेवन किया था, उसका फल है ।
सदासुखदासजी