भज्जा भगिणी मादा सुदा य बहुएसु भवसयसहस्सेसु ।
अयसायासकरीओ होंति विसीला य णिच्चं से॥939॥
पर-नारी गामी की पत्नी माता बहन और बेटी ।
भव-भव में अपयश दुःखदायक व्यभिचारिणी सदा होती॥939॥
अन्वयार्थ : पर की स्त्री में लंपटी पुरुष नरक-निगोद में परिभ्रमण करके कदाचित् मनुष्य भव को प्राप्त हो तो वहाँ स्त्री, बहन, माता, पुत्री, कुशीलनी तथा अपयश करने वाली और खेद कराने वाली मिलती है । ऐसे करोडों भवपर्यंत यदि स्त्री, माता, बहन, पुत्री को पाता है तो व्यभिचारिणी ही पाता है- शीलवती प्राप्त नहीं होती है ।

  सदासुखदासजी