पुरिसस्स दु वीसंभं करेदि महिला बहुप्पयारेहिं ।
महिला वीसंभेदुं बहुप्पयारेहिं वि ण सक्का॥950॥
पुरुषों में विश्वास कर सके नारी विविध प्रकारों से ।
कर न सकें नारी के प्रति विश्वास पुरुष असमर्थ रहें॥950॥
अन्वयार्थ : इन स्त्रियों के बुद्धि-बल की ऐसी सामर्थ्य है कि वे पुरुष को अनेक प्रकार से अपना विश्वास/प्रतीति करा देती हैं, झूठ की सच्ची प्रतीति करा देती हैं, जिसे पुरुष ने बारम्बार अनुभव किया है, परिचय किया है, ऐसे सत्य में ऐसी झूठ की प्रतीति करा देती हैं और स्त्री को विश्वास कराने की पुरुष के पास कुछ सामर्थ्य नहीं है ।

  सदासुखदासजी