
अकदम्मि वि अवराधे ताओ वीसच्छमिच्छमाणीओ ।
कुव्वंति वहं पदिणो सुदस्स ससुरस्स पिदुणो वा॥953॥
वे स्वच्छन्द प्रवृत्ति चाहती अतः बिना कोई अपराध ।
पति, पुत्र का और श्वसुर का तथा पिता का करती घात॥953॥
अन्वयार्थ : अपनी स्वच्छन्द प्रवृत्ति रूप इच्छा करने वाली स्त्री बिना अपराध के ही अपने पति को मार डालती है; पुत्र को, ससुर को तथा पिता को मारती है ।
सदासुखदासजी