साकेदपुराधिवदी देवरदी रज्जसुक्खपब्भट्टो ।
पंगुलहेदंु छूढो णदीए रत्ताए देवीए॥955॥
नगर अयोध्या नृपति देवरति राज-सुखों से भ्रष्ट हुआ ।
लँगड़े पर मोहित रानी ने उसे नदी में फेक दिया॥955॥
अन्वयार्थ : देखो, साकेतपुर का स्वामी देवरति नामक राजा रक्ता नामक स्त्री के निमित्त राज्य त्याग देशांतर को गमन कर राज्य-सुख से रहित हो गया । उसको रक्ता नामक रानी ने पांगुला के निमित्त नदी में बहा दिया ।

  सदासुखदासजी