
ईसालुयाए गोववदीए गामकूडधूयिया सीसं ।
छिण्णं पहदो तध भल्लएण पासम्मि सीहबलो॥956॥
कोपवती ने ईर्ष्या-वश हो ग्राम कूट की पुत्री का ।
काट दिया सिर और सिंहबल उर में भाला भोंक दिया॥956॥
अन्वयार्थ : कोई सिंहबल नामक व्यक्ति उसकी गोपवती स्त्री, उस ग्रामकूट की पुत्री ने अपनी सौंकि/सौत का मस्तक छेदा और शक्ति नामक आयुध से सिंहबल नामक पति को मार डाला ।
सदासुखदासजी