
वग्घादीया एदे दोसा ण णरस्स तं करिज्जण्हू ।
जं कुणइ महादोसं दुट्ठा महिला मणुस्सस्स॥959॥
व्याघ्रादिक भी करते हैं नहिं पुरुषों का एेसा नुकसान ।
जैसा महिलायें करती हैं पुरुषों का महान नुकसान॥959॥
अन्वयार्थ : मनुष्य को जो महादोष दुष्ट स्त्री करती है, वैसे महादोष पुरुष को व्याघ्र, विष, चोर, अग्नि, जल, मदोन्मत्त हस्ती, कृष्ण सर्प जो शत्रु हैं, वे भी नहीं करते हैं ।
सदासुखदासजी