
महिला पुरिसमवण्णाए चेव वंचेइ णियडिकवडेहिं ।
महिला पुण पुरिसकदं जाणइ कवडं अवण्णाए॥963॥
महिला छल से ठगे पुरुष को, पुरुष जान नहिं पाता है ।
किन्तु पुरुष के किये कपट को नारी तुरत जान लेती॥963॥
अन्वयार्थ : स्त्री की ऐसी सामर्थ्य है कि वह सहज ही मायाचार/कपट करके पुुरुष को ठगती है, उसके कपट को पुरुष नहीं जान सकता और पुरुष के द्वारा किये गये कपट को यह स्त्री सहज ही जान लेती है । उसमें कुछ प्रयत्न ही नहीं करती, फिर भी सहज जानने में आ जाता है ।
सदासुखदासजी