जह जह मण्णेइ णरो तह तह परिभवइ तं णरं महिला ।
जह जह कामेइ णरो तह तह पुरिसं विमाणेइ॥964॥
ज्यों-ज्यों नर करता आदर पर, नारी करे निरादर भाव ।
जैसे-जैसे करे कामना त्यो-त्यों नारी बेपरवाह॥964॥
अन्वयार्थ : पुरुष जितना-जितना स्त्री का सम्मान करता है, स्त्री उतना-उतना पुरुष का तिरस्कार करती है और पुरुष जैसे-जैसे इसे काम के लिये चाहता है, तैसे-तैसे यह पुरुष का अपमान करती है ।

  सदासुखदासजी