
परमाणू वि कहंचिवि आगच्छेज्ज गहणं मणुस्सस्स ।
ण य सक्का घेत्तुं जे चित्तं महिलाए अदिसण्हं॥971॥
यह मनुष्य परमाणु का भी किसी तरह कर सकता ज्ञान ।
उससे भी अति सूक्ष्म चित्त नारी का कर न सके नर ज्ञान॥971॥
अन्वयार्थ : मनुष्य के कदाचित् किसी प्रकार से अति सूक्ष्म परमाणु भी ग्रहण करने में आ जाये, परन्तु अति सूक्ष्म स्त्री के परिणाम को ग्रहण करने/जानने में कोई समर्थ नहीं है ।
सदासुखदासजी